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दोहद  : पुं० [सं० दोह√दा (देना)+क] १. गर्भकाल में गर्भवती स्त्री के मन में उत्पन्न होनेवाली अनेक तरह की इच्छाएँ या कामनाएँ। २. वह काम, चीज या बात जिसकी उक्त अवस्था और रूप में इच्छा या कामना होती हो। ३. गर्भवती रहने या होने की दशा में होनेवाली मिचली या ऐसा ही कोई सामान्य शारीरक विकार। डकौना। ४. गर्भवती होने की अवस्था या भाव। ५. गर्भवती होने के चिह्न या लक्षण। ६. भारतीय साहित्य में, कविसमय के अनुसार कुछ विशिष्ट पौधों, वृक्षों आदि के सम्बन्ध में यह मान्यता कि जब वे खिलने या फूलने को होते हैं, तब उनमें गर्भवती स्त्रियों की तरह कुछ इच्छाएँ और कामनाएँ होती हैं जिनकी पूर्ति होने पर वे जल्दी, समय से पहले और खूब अच्छी तरह खिलने या फूलने लगते हैं। जैसे—सुन्दरी स्त्री के पैरों की ठोकर से अशोक, पान की पाक थूकने से मौलसिरी, गाने से गम या नाचने से कचनार लिखने अथवा फलने-फूलने लगते हैं। (दे० ‘वृक्ष दोहद’) ७. फलित ज्योतिष के अनुसार यात्रा के समय ऐसी विशिष्ट चीजें खाने या पीने का विधान जिनसे तिथि, दिशा, वार आदि से संबंध रखनेवाले दोषों का परिहार या शान्ति होती है।
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दोहदवती  : स्त्री० [सं० दोहद+मतुप् ङीप्] गर्भवती स्त्री। गर्भिणी।
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दोहदान्विता  : स्त्री० [सं० दोहद+अन्वित तृ० त०]= दोहदवती।
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दोहदी (दिन्)  : वि० [सं० दोहद+इनि] जिसे प्रबल इच्छा हो। स्त्री० गर्भवती स्त्री।
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दोहदोहीय  : पुं० [सं०] एक प्रकार का वैदिक गीत या साम।
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