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शब्द का अर्थ
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पैवंद :
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पुं० [फा०] १. किसी बड़ी चीज के साथ कोई छोटी चीज जोड़ने की क्रिया या भाव। २. फटे हुए कपड़े पर लगाई जानेवाली चकती। थिगली। ३. किसी पेड़ की वह टहनी जो काटकर उसी जाति के दूसरे पेड़ की टहनी में बाँधी जाती है। (ऐसी टहनी में लगनेवाले फल अधिक स्वादिष्ट होते हैं) मुहा०—(किसी बात में) पैवंद लगाना=कोई ऐसी कल्पित या नई बात कहना जिससे पहलेवाली किसी बात की त्रुटि या दोष दूर हो जाय, अथवा वह अच्छी ठीक जान पड़ने लगे। जैसे—तुम भी बातों में पैवंद लगाना खूब जानते हो। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
पैवंदी :
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[फा०] १. जिसमें पैवंद लगाना या लगाया गया हो। २. (पौधा या वृक्ष) जो पैवंद या कलम लगाकर तैयार किया गया हो। (‘बीजू’ में भिन्न) ३. वर्णसंकर। दोगला। (व्यंग और परिहास) पुं० बड़ा आड़ू। शफतालू। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
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