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एक नदी दो पाट

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :323
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9560

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'रमन, यह नया संसार है। नव आशाएँ, नव आकांक्षाएँ, इन साधारण बातों से क्या भय।


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यह सूचना विनोद तक पहुँची। उसने उनको धैर्य बँधाया और यह व्यर्थ भ्रम उनके मन से दूर किया।

मुनि बाबा की बात की किसी ने परवाह न की। विलियम मन-ही मन मुस्कराता रहा। वह इन मूर्खों की मानसिक निर्बलता को भली भाँति जानता था। उसे दृढ़ विश्वास था कि आपत्ति टूटने की देर है कि सब-के-सब स्वयं मार्ग पर आ जाएँगे।

रात आधी से अधिक बीत चुकी थी। अब ब्रह्मपुत्र में पानी का जोर बढ़ गया और समस्त घाटीँ बाढ़ के भयानक शोर से काँपने लगी। आकाश में बादलों की गरज और बिजली की चमक से हृदय सहम गए। अचानक एक जोर का धमाका हुआ और लोग चीखकर अपने घरों से बाहर आ निकले।

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