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फ्लर्ट

प्रतिमा खनका

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :609
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9562

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जिसका सच्चा प्यार भी शक के दायरे में रहता है। फ्लर्ट जिसकी किसी खूबी के चलते लोग उससे रिश्ते तो बना लेते हैं, लेकिन निभा नहीं पाते।

‘यू गॉट मी!’ वो मुस्कुराया ‘अंश, अब तुम्हें पोर्टिको पर थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत होगी। मैं आने वाले कुछ दिनों में बहुत बिजी रहने वाला हूँ।’ उसने जेब में से सिगरेट केस निकाला।

‘क्यों?’

‘मैं अपनी खुद की एड एजेन्सी भी प्लान कर रहा हूँ।’ उसने मुँह में लगाकर उसने लाईटर जलाया।

‘सच?’ मैंने भी एक सिगरेट हाथ में ली ‘तो अंकल इनवेस्ट करेगें?’

‘ओह प्लीज!’ उसने मेरी सिगरेट को भी आग दिखायी। ‘मेरा नहीं लेकिन सोनाली का बाप पैसा लगाने को तैयार है लेकिन एक शर्त पर।’ धुँआ छोड़ते हुए- ‘तुम्हें पहले की तरह ही रोशन होना होगा।’

‘तो तुम्हें नहीं लगता कि ये वक्त शादी करने के लिए सही नहीं है? अभी वो योगिता की खबर भी ठण्डी नहीं पड़ी।’

‘ये खबर के अच्छे असर भी हो सकते हैं, बस हमें पता होना चाहिये कि इस खबर को इस्तेमाल कैसे करना है? वैसे तुम इसकी चिन्ता मत करो, वो तुम्हारी क्रेजी फैन सोनाली इस पर काम कर रही है। शी इज ए मास्टर!’ एक लम्बी मुस्कान के साथ-’अंश ये मौके वगैरह तो आगे भी तुझे मिलते ही रहेगें लेकिन इसके लिए अपनी जिन्दगी खराब करने की जरूरत नहीं है। मेरा अब अपना परिवार है और मैं तुझे उतना वक्त नहीं दे पाता। तू यहाँ फिर से अकेला हो गया है।’

‘तुम्हारे पास आज बहुत सी वजह हैं।’ मैंने हँसकर शिकायत की।

‘वजह तो मेरे पास एक और है लेकिन शायद वो तेरे लिए मायने ना रखे।’

‘क्या?’

‘तुम्हारी वो शिमला वाली दोस्त, तुमने उससे आखिरी बार कब बात की थी?’

‘याद नहीं। क्यों?’

‘वो शादी कर रही है।’ उसने खत्म होती सिगरेट एश ट्रे में मसलते हुए बताया।

मेरी नसों में कुछ दौड सा गया! मेरे दिमाग में कोई विचार नहीं आया लेकिन..... मैं स्तब्ध हो गया!

‘क्या हुआ?’

‘इट इज नॉट पॉसिबल!’ मेरी नजरें किसी तरफ रुक नहीं रहीं थीं।

‘क्यों वो शादी नहीं कर सकती?’

‘नहीं लेकिन आज तक मेरे लिए जितने भी पागल थे न वो उन सबसे बड़ी पागल थी।’ मेरी मुस्कुराहट में जान नहीं थी।

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