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कटी पतंग

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9582

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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।


''भगवान के कामों में कौन बोल सकता है! होनी को कौन टाल सकता है!''

कमल पर उसकी इस तसल्ली का कुछ असर न हुआ। उसने एक नजर चिता पर डाली और दूसरी उन लोगों पर जो क्षण-भर मेंजीवन-भर के नाते तोड़कर लालाजी से दूर चले जा रहे थे। उसे इस बात का अत्यन्त दुख था कि वह लालाजी के अन्तिम समय उनके पास नहीं था।

''इंस्पेक्टर!'' वह दर्दभरी आवाज में बोला।

''हां, कमल।''

''क्या यह सच है कि उनकी मौत जहर देने से हुई है?''

''बिल्कुल सच। डाक्टर की रिपोर्ट यही बताती है।''

''और क्या यह भी सच है कि इसमें पूनम का हाथ है?''

''बिल्कुल-और अब तो वह यह भी कबूल कर चुकी है कि वह पूनम नहीं अंजना है-और वह बच्चा भी उसका नहीं है।''

''उस दूसरी औरत के बारे में उसका क्या कहना है?''

''एक यही प्वाइंट है जहां वह सच नहीं बोल रही। उसका बयान है कि असली पूनम मर चुकी है। वह उसकी सहेली थी और इस औरत से उसका कोई वास्ता नहीं।''

''और इस खून के बारे में वह क्या कहती है?''

''साफ इनकार करती है।''

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