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कटी पतंग

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9582

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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।


''क्यों? कालेज के दिनों में तो वह बड़ी सीधी-सादी लड़की थी।'' यह कहने के बाद वह भीतर से कालेज का ग्रुप फोटो निकाल लाया और उसमें खड़ी वह लड़की दिखाने लगा जो दो वर्ष पहले की अंजना थी। कमल ने ध्यान से वह ग्रुप फोटो देखा और सभी चेहरों पर नजरें दौड़ाते हुए उससे पूछा-''पूनम नाम की कोई लड़की भी पड़ती थी तुम्हारे साथ?''

''नहीं-वह हमसे एक साल पीछे थी-लेकिन शादी के बाद उसने कालेज छोड़ दिया था।''

क्षण-भर के लिए कमल चुप रहा फिर ग्रुप फोटो की ओर देखकर बोला-''तुमने कालेज कब छोड़ा?''

''थर्ड इयर में-बी० ए० न कर सका।''

''और अंजना-?''

''वह तो कालेज की योग्य लड़कियों में से थी और शायद बी० ए० भी किया था उसने?''

कमल ने तुरन्त बात बदल दी और गोलियों की खाली शीशी को हाथ में नचाते हुए बोला-''हां तो राकेश! डिप्टी साहब की मौत इन्हीं गोलियों से हुई है।''

''तो अब तुम्हारा क्या इरादा है?-मेरा मतलब है ये गोलियां खाने का?''

''नहीं, मैं तो यह जानने के लिए यहां आया हूं कि अगर वह दवा नुस्खे के बिना नहीं मिल सकती तो अंजना इसे तुम्हारी दुकान से कैसे ले गई?''

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