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कटी पतंग

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9582

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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।


''अंजू।'' वह बस इतना ही कह सका और अंजना अपना चेहरा आंचल में छिपाए पुलिस वालों के पीछे चली गई।

वह तेज-तेज कदम उठाती चली जा रही थी और कमल अपनी जगह पर बुत बना खड़ा था।

दूसरे दिन अभी सुबह का सूरज पहाड़ों की चोटियों पर नहीं उभरा था कि कमल की जीप गाड़ी पुलिस स्टेशन के बाहर आ रुकी। वह तेजी से उतरा और सीधा इंस्पेक्टर तिवारी के कमरे में जा पहुंचा।

''गुड मॉर्निंग इंस्पेक्टर!'' कमल ने कमरे में प्रवेश करते ही इंस्पेक्टर से कहा जो सुबह की चाय पी रहा था।

''आओ, आओ। आज सुबह ही सुबह कैसे?''

''सोचा, कल रात को मौका नहीं मिला-अब शुक्रिया अदा कर आऊं।''

''शुक्रिया तो हम पुलिस वालों को करना चाहिए तुम्हारा, जो असली अपराधी को पकड़ने में हमारी मदद की और एक निर्दोष को बचा लिया।''

''वह तो मेरा कर्तव्य था इंस्पेक्टर।'' वह चमककर बोला और फिर बात बदलते हुए उसने पूछा-''अंजना कहा है?''

''उसे रिहा कर दिया गया है।''

''कब?''

''थोड़ी देर पहले।''

''तो अब कहां गई है वह?''

''कुछ बताया नहीं। इतना जरूर पूछ रही थी कि काठगोदाम की बस कितने बजे जाती है!''

''ओ, आई सी!'' कमल तुरन्त कुर्सी पर से उठ खड़ा हुआ और इजाजत लिए बिना ही कमरे से बाहर निकल गया। तिवारी चकित-सा उसकी ओर देखता रह गया।

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