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ई-पुस्तकें >> मेरे गीत समर्पित उसको

मेरे गीत समर्पित उसको

कमलेश द्विवेदी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :295
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9589

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कानपुर का गीत विधा से चोली-दामन का रिश्ता है। यहाँ का कवि चाहे किसी रस में लिखे

132. आज सफ़र से लौटे हैं हम

 

आज सफ़र से लौटे हैं हम कल फिर जाना है।
इसी सफ़र में जीवन अपना हमें बिताना है।।

घुटनों-घुटनों चलकर कितने
बड़े हो गये हम।
अब तो अपने ही पैरों पर
खड़े हो गये हम।
इन पैरों पर इसी सफ़र को और बढ़ाना है।
आज सफ़र से लौटे हैं हम कल फिर जाना है।।

कहते हैं कुछ लोग-सफ़र यह
काँटों वाला है।
कुछ कहते हैं- मज़ेदार है
बहुत निराला है।
जिसने जैसा काटा उसने वैसा माना है।
आज सफ़र से लौटे हैं हम कल फिर जाना है।।

माना डगर न पूरी हमको
एक समान मिले।
कहीं मिले ऊँचाई हमको
कहीं ढलान मिले।
पर हम चलना सीख गये तो मंज़िल पाना है।
आज सफ़र से लौटे हैं हम कल फिर जाना है।।

 

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