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ई-पुस्तकें >> मेरे गीत समर्पित उसको

मेरे गीत समर्पित उसको

कमलेश द्विवेदी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :295
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9589

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कानपुर का गीत विधा से चोली-दामन का रिश्ता है। यहाँ का कवि चाहे किसी रस में लिखे

91. सुबह स्वप्न में देखा मैंने

 

सुबह स्वप्न में देखा मैंने तुम मेरे घर पर आये।
स्वप्न सुबह का सच होता है तो यह भी सच हो जाये।।

सपने देखे कई रात भर
लेकिन कोई याद नहीं।
तुमको देखा, कुछ भी मैंने
देखा उसके बाद नहीं।
सुबह स्वप्न में तुमने मुझसे बातें कीं फिर मुस्काये।
स्वप्न सुबह का सच होता है तो यह भी सच हो जाये।।

जितने पल भी साथ रहे तुम
वे पल खुशियों में बीते।
उस पल का क्या कहना जब हम
अपना दिल हारे-जीते।
सुबह स्वप्न में मेरे सँग-सँग तुमने कितने रास रचाये।
स्वप्न सुबह का सच होता है तो यह भी सच हो जाये।।

'सपने तो सपने होते हैं
सपने पर विश्वास नहीं।'
ऐसा वे ही कहते जिनको
अपने पर विश्वास नहीं।
सुबह स्वप्न में मैंने अपने विश्वासों के फल पाये।
स्वप्न सुबह का सच होता है तो यह भी सच हो जाये।।

 

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