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वापसी

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :348
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9730

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सदाबहार गुलशन नन्दा का रोमांटिक उपन्यास

''तो भूल जाइए उस क़ैद को...उस युद्ध के वातावरण को। अब आप केवल मेरे क़ैदी हैं...मेरे प्यार क़े क़ैदी।'' पूनम ने भावुकता से विभोर होकर उसके हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा।

रशीद ने झुककर उसकी आंखों में झांका तो उसे वहां प्यार के दीये से जलते दिखाई दिये। पूनम ने उसके सीने पर सिर रखकर आंखें बंद कर लीं।

''अच्छा...तो अब इस क़ैदी के लिए क्या हुकुम है?'' रशीद ने उसके दोनों कंधे पकड़कर उसे अपने आप से अलग करते हुए पूछा।

''आज रात का खाना हम इकट्ठे खाएंगे...होटल अकबर में।''

''It' ll be a pleasure for me!...मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगा।''

वचन के अनुसार ठीक दस बजे पूनम होटल अकबर में पहुंच गई। रशीद बाहर द्वार पर खडा़ उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। उसने बड़े उत्साह से आगे बढ़कर उसका स्वागत किया। हरी साड़ी में पूनम का सौंदर्य फूटा पड़ रहा था। उसके खिले हुए चेहरे पर रशीद की दृष्टि न ठहर रही थी। वह उसे साथ लिए डाइनिंग हाल तक चला आया।

हाल में अधिकतर मेज़ें भरी हुई थीं। रशीद पूनम को लिए हुए उस मेज़ तक चला आया जो उसने आज विशेष रूप से आरक्षित करा रखी थी। बैरा आया और उन दोनों की इच्छानुसार खाने का आर्डर लेकर चला गया। खाने से पहले रशीद ने उसे कोल्ड ड्रिंक्स लाने के लिए कहा। पूनम के ताज़ा निखरे हुए सौंदर्य को वह प्रशंसनीय दृष्टि से निहारे जा रहा था। पूनम ध्यानपूर्वक डाइनिंग हाल की छत पर की गई मीनाकारी के देख रही थी।

अकबर होटल का यह हाल कुछ मुग़ल राजभवनों के ढंग पर सजाया गया था। कांच की हज़ारों रंग-बिरंगी चूड़ियां छत से लटक रही थीं। होटल वालों ने इस हाल को शीश महल का नाम दे रखा था। रशीद ने पहले ही बैरे से हाल की बनावट इत्यादि के बारे में विस्तार से पूछ रखा था और अब मुग़ल इतिहास के पन्नों से हवाला देते हुए उसने पूनम को उसकी बारीकियां समझायीं।

तभी लाउड स्पीकर पर एक नयी डांसर 'लिली' के डांस की घोषणा हुई। रोशनियां बुझ गईँ और अब वहां केवल टिमटिमाती मोमबत्तियां जलती रह गईं। फ़र्श पर लगी स्पाट लाइट का प्रकाश हुआ और छत पर लटकी चूड़ियां आकाश में तारों के समान चमक उठीं।

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