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कटी पतंग

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9582

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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।


''लेकिन घर पर कोई नहीं है। मांजी को खबर करनी है।''

''घबराइए नहीं, सब काम हो जाएगा।''

अंजना इस बात का कोई उत्तर न दे सकी और विवश होकर उसे पुलिस इंस्पेक्टर के साथ जाना पड़ा। रमिया भागकर उसका दुशाला ले आई। अंजना ने राजीव को संभालने के लिए रमिया को ताकीद की और कंधों पर दुशाला डालकर वह तिवारी के साथ चल पड़ी।

जब वह पुलिस की जीपगाड़ी में बैठकर रवाना हुई तो उस समय तक आसपास के लोगों ने फाटक के बाहर जमघटा लगा दिया था। जितनी जबानें उतनी बातें हो रही थीं। हर कोई उस विधवा को शंकित दृष्टि से देख रहा था।

जब वह इंस्पेक्टर के साथ पुलिस चौकी पहुंची तो वहां वह औरत मौजूद थी जिसने उस घराने की बहू होने का दावा किया था। उसे देखते ही वह हैरान रह गई। उसके सामने सफेद साड़ी पहने शबनम बैठी थी। उसका नाम अंजना की जबान पर आते-आते रुक गया। वह पुलिस चौकी का वातावरण देखकर और भी अकुला उठी और मौन निगाहों से उसकी ओर देखने लगी।

''आप इन्हें जानती हैं क्या?'' तिवारी ने प्रश्न किया।

''नहीं।''

''इनका कहना है, ये पूनम हैं- डिप्टी साहब की बेवा बहू।''

''यह झूठ है।''

''तो सच क्या है अंजू?'' शबनम ने इठलाकर कहा।

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