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ई-पुस्तकें >> मेरे गीत समर्पित उसको

मेरे गीत समर्पित उसको

कमलेश द्विवेदी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :295
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9589

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कानपुर का गीत विधा से चोली-दामन का रिश्ता है। यहाँ का कवि चाहे किसी रस में लिखे

88. तेरा रूप सलोना

 

जिस दिन से देखा है मैंने तेरा रूप सलोना।
उस दिन से ही महक उठा है मन का कोना-कोना।।

सुबह नहाऊँ नदिया में तो
महकें जलधारायें।
महकी-महकी लगें हवायें
महकी सभी दिशायें।
तन है चाँदी-चाँदी मेरा मन है सोना-सोना।
जिस दिन से देखा है मैंने तेरा रूप सलोना।।

जागा नहीं चैन से पल भर
और न पल भर सोया।
जाने किस दुनिया में रहता
हूँ मैं खोया-खोया।
लगे कि जैसे किया किसी ने मुझ पर जादू-टोना।
जिस दिन से देखा है मैंने तेरा रूप सलोना।।

एक झलक ही पाकर तेरी
मैं ऐसा दीवाना।
जैसे ख़ुशबू पाकर भौंरा
झूमे, गाये गाना।
मन का मोहन तुझे पुकारे-राधे, दर्शन दो ना।
जिस दिन से देखा है मैंने तेरा रूप सलोना।।

 

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