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नारी की व्यथा

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :124
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9590

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मधुशाला की तर्ज पर नारी जीवन को बखानती रूबाईयाँ


106. यदि नारी मालकिन बने तो


यदि नारी मालकिन बने तो
तो नारी से नारी दुखी
यदि नारी नौकरानी बने
तो भी नारी से नारी दुखी

दुखी है नारी, नारी से ही
जबकि पैदा होती नारी से नारी

नारी से पैदा हुई नारी हूँ
क्योंकि मैं इक नारी हूँ।


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