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ई-पुस्तकें >> मेरे गीत समर्पित उसको

मेरे गीत समर्पित उसको

कमलेश द्विवेदी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :295
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9589

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कानपुर का गीत विधा से चोली-दामन का रिश्ता है। यहाँ का कवि चाहे किसी रस में लिखे

77. गीतों का उपहार

 

भेज रहे हैं आज तुम्हें हम गीतों का उपहार।
इन गीतों में बसा हमारे दिल का सारा प्यार।।

पहला गीत हुआ था जब हम
पहली बार मिले थे।
जाने कितने फूल हमारे
मन में तभी खिले थे।
उन फूलों से अब तक महके सुधियों का संसार।
भेज रहे हैं आज तुम्हें हम गीतों का उपहार।।

गीत दूसरा जन्मा था जब
तुम हमको भाये थे।
हमें देखकर तुम भी थोड़ा-
थोड़ा मुस्काये थे।
और तुम्हारे नयनों ने थे किये हृदय पर वार।
भेज रहे हैं आज तुम्हें हम गीतों का उपहार।।

मिलना-जुलना शुरू हुआ फिर
घटी हमारी दूरी।
घंटों-घंटों बातें की पर
कभी हुईं ना पूरी।
जो बातें कीं वही बन गयीं गीतों का आधार।
भेज रहे हैं आज तुम्हें हम गीतों का उपहार।।

 

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