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नारी की व्यथा

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :124
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9590

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मधुशाला की तर्ज पर नारी जीवन को बखानती रूबाईयाँ


2. बोली दादी, बेटा बहू का


बोली दादी, बेटा बहू का
अल्ट्रासाऊँड तो कराके ला
पता चलेगा बेटी है या बेटा
मुझे भी आके जल्दी बता।

सुनकर यह पिता मेरे
माँ को अस्पताल ले गये

अल्ट्रासाऊँड में मैं आती हूँ
क्योंकि मैं इक नारी हूँ।

¤ ¤

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